हिमाचल प्रदेश के 6 प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर | इतिहास और वास्तुकला
हिमाचल प्रदेश के 6 प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर | इतिहास और वास्तुकला
हिमाचल में वैसे तो बहुत से मंदिर हैं। कई मंदिर नए बने हैं और कई बहुत ही प्राचीन हैं।
सभी मंदिरों की अपनी-अपनी गाथाएं हैं। आज मैं आपको हिमाचल के मुख्य मंदिरों के बारे में बताऊंगा।
तो चलिए दोस्तों, आज हम बात करते हैं हिमाचल के 6 मंदिरों की, जो बहुत ही सुंदर बनाए गए हैं और इनकी प्राचीन वास्तुकला बहुत प्रसिद्ध है।
1. अर्ध नारिश्वर मंदिर मंडी
- अर्धनारी ईश्वर मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में स्तिथ है.
- यह कला समृद्ध मंदिर है.
- इसकी पथर की मूर्ति शिव और पार्वती का प्रतीक है.
- इसका दक्षिणार्थ शिव को और वामअर्द्ध पार्वती को सम्पर्तित है.
- शिव को जटाओ वाला, मानवमुंडो की माला पहने, एक सांप लपेटे, एक हाथ में एक वाद्य यंत्र और दूसरे में एक डमरू लिए हुए दिखाया गया है.
- पार्वती को एक मुकुट, एक झुमरी और एक नथनी धारण की है.
- मूर्ति में जुड़े एक पत्थर के टुकड़े पर एक बैल और एक शेर खुदे हुए है, जो इन दोनों की सवारिया है.
2. गोरीशंकर का मंदिर
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| गोरीशंकर मंदिर |
- यह मंदिर नागर वास्तु कला के दुर्लर्भ उद्धारणों में से एक है.
- इसकी बाहरी दीवारे उभरी हुई आकृतियो और विस्तृत साज सज्जा से समृद्ध है!
- मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्थित चेत्या तोरण में त्रिमूर्ति सिर बना है.
- इसी तोरण के ऊपर एक सिंह की बैठी हुई मूर्ति है जिसकी आकृति अत्यंत रोचक है!
3. त्रिलोकीनाथ मंदिर लाहौल स्पीति
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| त्रिलोकी नाथ मंदिर लाहौल स्पीति |
- त्रिलोकी नाथ का मंदिर लाहौल में स्थित प्रसिद्ध मंदिर चंद्रभागा नदी की घाटी में स्थित है.
- मूल मंदिर को आठवीं सदी के आरंभ में ललितादित्य ने बनवाया था.
- लेकिन आठवीं सदी के अंतिम वर्षों में पदम संभवत ने इसे बौद्ध मंदिर का रूप दे दिया
- त्रिलोकी नाथ या अबलोकीतेस्वर मंदिर की विशेषता यह है कि यह भारत में लंबे समय तक एक बौद्ध मंदिर ही बना रहा
- बोधगया में मंदिर के अलावा किसी और मंदिर की यह विशेषता नहीं है
- इस मंदिर का निर्माण पथरो द्वारा किया गया है इसका शिखर छोटा और अंशथ :अनगढ़ ईंटो से बना हुआ है!
- इसका ढलान दो भव्य स्तंभों पर टिका है और उसमें खूबसूरत नक्काशी की गई है!
4. मशरूर के मंदिर काँगड़ा
- मशरूर काँगड़ा के एकशम मंदिर पुरे हिमालय क्षेत्र में नागर शैली के सबसे पुराने उदहारण है. चट्टानों को काटकर बनाये गए ये मंदिर आठवीं सदी के है.
- समरुर की कट्टी चट्टानों से बने मंदिर जैसे अधिकतम दक्षिनी और पश्चिमी भारत में पाए जाते है, यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है!
- शिखर प्रकार के 15 मंदिरो का एक समूह है जो साज सज्जा के कारण दर्शाको को प्रभावित करते है!
5. वेद्यनाथ मंदिर काँगड़ा.
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| वेद्यनाथ मंदिर काँगड़ा |
- शिव को समर्पित वेद्यनाथ मंदिर वैजनाथ काँगड़ा में स्थित है जिसे प्राचीन काल में किरग्राम कहा जाता था!
- यह किरातो की सुप्रसिद्ध राजधानी थी जिन्होंने 40 वर्षों तक आर्यो से संघर्ष किया था!वर्तमान मंदिर 13 वीं सदी के आरम्भ में बनबाया गया था! किन्तु 19वीं सदी में राजा संसार चंद ने इसका पूंरुधार करवाया.
- इस मंदिर में अधतुय जिसे वैद्यनाथ कहा जाता है, जिसके ऊपर आम शंकवाकर कुंडली है और एक मंडप है.
- मंडप के सामने चार खाम्बो पर खड़ा एक राजशी दालान है!
6. बशेश्वर महादेव मंदिर
- यह मंदिर 8वीं और 9वीं सदी में बना था. और इसे पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के सुंदरम स्मारको में गिना जाता है!
- यह शिखर मंदिर की परवर्ती गुप्त परम्परा का एक अनूठा उदहारण है!
- यह मंदिर शिव को समर्पित है!
- इस मंदिर में एक मोती और उभरी हुई मीनार है, जिसके सिरे पर पत्थर का एक सूर्य चक्र है! मंदिर की बाहरी सतह के ऊपरी भाग पर पुरातत्विक प्रकार की नक्कशि और निचले भाग पर सज्जात्मक प्रकार की नक्काशी की गयी है.
- इसमें गमलो और बेलबुट्टो की नक्काशी बार बार हुई है.
- इस मंदिर के पुरातविक काम सुविचारित, संतुलित और सारुचिपूर्ण ढंग से पुरे किये गए है!





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