मराठा साम्राज्य और इसके उत्तराधिकारी
मराठा साम्राज्य और इसके उत्तराधिकारी
शिवाजी
शिवाजी के नेतृत्व मे 17 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मराठा शक्ति का उदय हुआ।शिवाजी मराठा साम्राज्य के शक्ति शाली राजा थे। शिवा जी का जन्म 1627 ई. में पूना के शिवनेर किले में हुआ था। शिवा जी के पिता का नाम शाह जी भोंसले और माता जीजाबाई थी तथा संरक्षक दादा कोंड देव थे।
शिवा जी का विवाह सालबाई निम्बालकर से 1640 ई. में हुआ शिवाजी ने मराठी भाषा को दरबार मैं प्रयोग में लाया।शिवाजी के अध्यात्मक गुरु समर्थ रामदास थे।शिवाजी की कर व्यवस्था मालिक अम्बर की कर व्यवस्था पर आधारित थी।भूमि मापन के लिए काठी एवं मानक छड़ी का प्रयोग मराठा सम्राज्य शिवाजी के शासन काल में शुरू हुआ।
शिवा जी के अलग अलग किलो पर अधिकार के साथ मराठा साम्राज्य का विस्तार
- वीर मराठा साम्राज्य के वीर शिवा जी ने धीरे धीरे अलग अलग दुर्गो पर अधिकार करके अपनी ताकत को बढ़ाया और रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया.
- बीजापुर के सुल्तान अली आदिल शाह ने 1659 ई. मैं अफजल खां को शिवाजी को नियंत्रित करने भेजा परन्तु वो शिवा जी के हाथो मारा गया।
- ऑरेंगजेब ने भी शाइस्ता खां को भेजा लेकिन मराठा वीर शिवा जी ने उसे भी भगा दिया।
- ऑरेंगजेब ने दोवारा मराठा साम्राज्य को पराजित करने के लिए 1665 ई. में राजा जयसिंह को भेजा।
- राजा जयसिंह ने शिवा जी से पुरान्दर की सन्धि (1665) करने पर विवश किया, जिसमे शिवाजी के काफ़ी दुर्ग मुगलो के पास चले गए।
- शिवाजी को 1666 ई. में उनके पुत्र शम्भा जी के साथ आगरा के जयपुर भवन में नजरबंद किया गया, परन्तु वें वहाँ से भाग निकले।
- शिवा जी के प्रशाशन की एक मुख्य विशेषता अष्टप्रधान यानि उनके आठ प्रमुख मंत्री थे।
- सन 1674 ई. में शिवाजी ने रायगढ़ के दुर्ग में महाराष्ट्र के स्वतंत्र शासक के रूप में अपना राज्याभिषेक कराया और छत्रपती की उपाधि ग्रहण की थी।
- शिवाजी ने सूरत को 1664 ई. एवं 1679 ई. मैं लुटा तथा 12 अप्रैल 1680 को शिवा जी की मृत्यु हो गयी।
आर्थिक स्थिति
भू -राजस्व के लिए पुरे राज्य को 16 इकाईयो में विभाजित किया गया। शिवा जी की आय का मुख्य साधन चौथ था। यह(1/4भाग) कर उन मराठा सरदारों द्वारा लिया जाता जाता था, जो शिवाजी के प्रत्यक्ष शाशन के अधीन नहीं थे, बल्कि स्वायत स्थिति में थे।
आय का दूसरा मुख्य साधन सरदेशमुखी था। यह राज्यों की आय का (1/10 भाग ) होता था। शिवा जी ने पैदवार का 33% लगान के रूप में प्राप्त किया। बाद में स्थानीय करो को समाप्त करने के बाद पैदावार का 40% लेने लगे। शिवाजी के नियमित घुड़स्वार सैनिक को पागा या बरगीर एवं अस्थायी घुड़सवार सैनिक को सिलहदार कहा जाता था।
शिवा जी के उत्तराधिकारी
1. संभाजी 1680- 1689 ई.
शिवा जी की मृत्यु के पश्चात उनका ज्येष्ठ पुत्र शंभाजी ने उज्जैन के हिंदी एवं संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान् कलश को अपना सलाहकार नियुक्त किया। ऑरेंगजेब ने 1689 ई. में शम्भा जी तथा उसके सहयोगी कवि कलश की हत्या करवा दी।
2. राजा राम
1689-1700 ई.
शम्भा जी की मृत्यु के बाद शिवाजी के दूसरे पुत्र राजाराम को छत्रपति घोषित किया गया, जो 1689 ई. से 1700 ई. तक रहे। राजाराम ने अपनी दूसरी राजधानी सत्तारा को बनाया। 1700 ई. में उनकी मृत्यु के पश्चात सिंघगढ़ में तारा बाई (1700-1707 तक )का प्रभुत्व रहा। तारा बाई राजाराम की विधवा थी। उसने अपने बेटे शिवाजी द्वितीय का समर्थन किया।
3. शाहू (1707-1748)
ऑरेंगजेब ने 1689 ई. में शम्भा जी के साथ शाहू को भी बंदी बना लिया था। 18 वर्षो तक बंदी जीवन बिताने के बाद 1707ई. में बाहदुर प्रथम ने उसे मुक्त कर दिया। 1707 ई. में ही शाहू ने स्वयं को मराठा राज्य का शासक घोषित कर दिया और खेड़ा का युद्ध में तरबाई को पराजित किया एवं सातारा में अपना राज्यअभिषेक कराया। अपनी शक्ति में वृद्धि के लिए शाहू न 1713 ई. में बाला जी विश्वनाथ को मराठा राज्य का पेशवा नियुक्त किया।
शाशन की अस्थिरता का फायदा उठाकर बालाजी विश्वनाथ ने पेशवा की शक्ति में पर्याप्त बृद्धि की। बालाजी विश्वनाथ 1713 ई. में प्रथम पेशवा बना, जिसकी 1720 ई. में मृत्यु हो गयी।
4. बाजीराव प्रथम (1720-1740 ई. )
20 वर्ष की अल्पआयु में 1720 ई. में पेशवा बना।7 मार्च 1728 को बाजीराव प्रथम एवं निजामुलमुल्क के बिच पलखेड़ा जा युद्ध हुआ जिसमे निज़ाम की हार हुई। दिल्ली पर आक्रमण करने बाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था।
बाजीराव प्रथम मस्तानी नामक महिला से संबंध होने के कारण चर्चित रहा था। बाजीराव नीतियों और युद्धओं द्वारा मराठा सकती का विस्तार किया। 1740 ई. में इसकी मृत्यु हो गयी।
5. बालाजी बाजीराव (1740-1761ई. )
1740 ई. में बाजीराव का बेटा बालाजी बाजीराव पेशवा बना। इसे नाना साहब भी कहा गया। 1750 ई. में हुए संगोला समझौते के तहत यह मराठा संघ का वास्तविक प्रथम पेशवा बना। पानीपत के तृतीया युद्ध में मराठो की पराजय के कुछ समय बाद ही 23 जून, 1761 को बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गयी।
6. माधवराव (1761- 1772ई. )
1761 ई. में माधवराव पेशवा बना। इसने शाह आलम II को 1771 ई. में दिल्ली तख्त पर बैठाया. अंतिम पेशवा बाजीराव II था।
महत्वपूर्ण तिथियां
- 1630 ई. — शिवाजी का जन्म
- 1659 ई. — अफजल खान की मृत्यु
- 1664 ई. — सूरत पर पहला प्रमुख मराठा आक्रमण
- 1665 ई. — पुरंदर की संधि
- 1666 ई. — शिवाजी का आगरा जाना और वहां से निकलना
- 1674 ई. — शिवाजी का राज्याभिषेक
- 1680 ई. — शिवाजी की मृत्यु
- 1689 ई. — संभाजी की मृत्यु
- 1707 ई. — शाहू की मुक्ति और खेड़ का युद्ध
- 1713 ई. — बालाजी विश्वनाथ पेशवा बने
- 1720 ई. — बाजीराव प्रथम पेशवा बने
- 1728 ई. — पालखेड़ का युद्ध
- 1740 ई. — बाजीराव प्रथम की मृत्यु और बालाजी बाजीराव पेशवा बने
- 1761 ई. — तीसरा पानीपत का युद्ध और बालाजी बाजीराव की मृत्यु
- 1772 ई. — माधवराव प्रथम की मृत्यु
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